बेंगलुरु, 8 अगस्त 2026: बेंगलुरु में ‘बांग्लादेशियों की पहचान’ के नाम पर चलाए गए कथित सत्यापन अभियान के दौरान सैकड़ों प्रवासी मजदूरों को हिरासत में लिए जाने और उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगा है। मानवाधिकार और मजदूर संगठनों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर कर्नाटक के गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक और बेंगलुरु पुलिस आयुक्त से शिकायत की है।
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL), ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (AILAJ), डोमेस्टिक वर्कर्स राइट्स यूनियन (DWRU) और ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU) ने 8 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के मुताबिक, शनिवार सुबह पुलिस की टीमें बेंगलुरु के विभिन्न इलाकों की झुग्गी बस्तियों में पहुंचीं और महिलाओं तथा बच्चों समेत सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया। संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने लोगों से दस्तावेज दिखाने को कहा और दस्तावेज पेश किए जाने के बावजूद कई लोगों को पुलिस वाहनों में बैठाकर थानों, कन्वेंशन सेंटरों और मैरिज हॉलों में ले जाया गया।
संगठनों का दावा है कि हिरासत में लिए गए अधिकांश लोग गरीब, दिहाड़ी मजदूर और प्रवासी कामगार हैं।
शिकायत में वर्थुर पुलिस स्टेशन में 41 लोगों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है। संगठनों के मुताबिक, कुछ लोगों ने पुलिस पर लाठियों से मारने और जबरन वाहनों में बैठाने का आरोप लगाया। इनमें एक 60 वर्षीय व्यक्ति और पहले से घायल एक व्यक्ति भी शामिल था। एक 30 वर्षीय व्यक्ति ने आरोप लगाया कि चार पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई की, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।
बांडेपाल्या पुलिस पर चार झुग्गी बस्तियों से 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने का आरोप है। वहीं, हेब्बागोडी में करीब 150 लोगों को हिरासत में लिए जाने और 50 से अधिक मोबाइल फोन जब्त किए जाने का दावा किया गया है।
परप्पना अग्रहारा पुलिस पर कुडलु, रायसंद्रा, शांतिपुरा और चूडासंद्रा से 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त किए और करीब 20 लोगों को अलग कमरे में बंद कर दिया तथा उन्हें संदिग्ध विदेशी नागरिक बताया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने कई लोगों के मोबाइल फोन की जांच की और निजी संदेशों तथा कॉल रिकॉर्ड को देखा। कुछ लोगों को कथित तौर पर केवल इसलिए फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) भेजा गया क्योंकि उनके फोन में अंतरराष्ट्रीय नंबर पाए गए थे।
संगठनों ने कहा कि किसी फोन में विदेशी नंबर होना किसी व्यक्ति की विदेशी नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
संगठनों ने पुलिस कार्रवाई को “पूरी तरह गैरकानूनी और संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के बिना उसकी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।
शिकायत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35 का हवाला देते हुए कहा गया है कि गिरफ्तारी के लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पालन करना आवश्यक है।
मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि कई लोगों ने उन्हें बताया कि भारतीय नागरिक होने का सबूत देने के नाम पर पुलिस की ओर से उन्हें पहले भी परेशान किया गया है।
संगठनों ने हिरासत में मौजूद सभी लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई, घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण और इलाज तथा पूरे अभियान की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई, कथित अपराधों के संबंध में FIR दर्ज करने और अभियान से जुड़े CCTV फुटेज, स्टेशन डायरी तथा अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की भी मांग की है।
संगठनों ने कहा कि पहचान या दस्तावेजों की जांच यदि जरूरी हो तो भी इसे कानून के अनुसार, उचित नोटिस और व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए किया जाना चाहिए। इसे किसी गरीब या प्रवासी मजदूर समुदाय की सामूहिक हिरासत या उत्पीड़न का आधार नहीं बनाया जा सकता।