इंसाफ न्यूज नेटवर्क
अंतरा स्वांकार
दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर क्षेत्र में 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और भय का माहौल बना हुआ है। पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग से शुरू हुआ जनाक्रोश अब व्यापक पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों को लेकर नए विवाद का कारण बन गया है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि 5 जुलाई को हुई हिंसा और इंद्रजीत मंडल की कथित मॉब लिंचिंग की जांच के नाम पर ऐसे लोगों को भी हिरासत में लिया जा रहा है, जिनका घटना से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। लगातार छापेमारी और गिरफ्तारी की आशंका के कारण कई गांवों के पुरुष घर छोड़कर अन्य स्थानों पर चले गए हैं, जबकि महिलाएं और बच्चे असुरक्षा तथा मानसिक तनाव के माहौल में रह रहे हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 35 वर्षीय इंद्रजीत मंडल की हत्या को “कट्टरपंथी तत्वों”, “देशविरोधी शक्तियों” और मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से प्रभावित लोगों से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि उन्हें उनकी हिंदू पहचान के कारण निशाना बनाया गया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पुलिस ने बारुईपुर और आसपास के कई इलाकों में तलाशी अभियान तेज कर दिया।
परिजनों और स्थानीय लोगों का दावा है कि दर्जनों व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जो कथित तौर पर न तो घटनास्थल पर मौजूद थे और न ही हिंसक गतिविधियों में शामिल थे। अलीपुर महाजनपाड़ा, भाटपाड़ा, पोदोझोला, कादमताला, मोगराहाट और आसपास के अन्य इलाकों में पुलिस कार्रवाई के बाद भय का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, मछली विक्रेताओं, दर्जियों, पोल्ट्री व्यवसायियों, ठेका मजदूरों और दिहाड़ी श्रमिकों सहित अनेक लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। कुछ परिवारों का आरोप है कि रात में छापेमारी की जा रही है और गिरफ्तार लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एनकाउंटर पर उठे सवाल
4 जुलाई को बारुईपुर के सुरज्यापुर क्षेत्र में 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार, बच्ची अपने जन्मदिन के लिए सामान खरीदने घर से निकली थी। बाद में उसका शव सूरजपुर रेलवे स्टेशन के निकट एक जलाशय से बरामद किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों और यौन उत्पीड़न के संकेत मिलने की बात कही गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से प्रभास मंडल और अन्य संदिग्धों की पहचान हुई। घटना के विरोध में 5 जुलाई को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़क और रेल अवरोध, पुलिस के साथ झड़प तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। इसी दौरान 35 वर्षीय इंद्रजीत मंडल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दिए जाने का आरोप है।
पुलिस ने रेप और मर्डर मामले में प्रभास मंडल, आनंद सरकार, देबाकर सरदार और कबीर मुल्ला सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा पॉक्सो अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए।
मामला तब और विवादास्पद हो गया जब मुख्य आरोपी प्रभास मंडल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। जिला पुलिस अधीक्षक पलाश चंद्र ढाली के अनुसार, घटनास्थल के पुनर्निर्माण के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया, जिसके बाद हुई गोलीबारी में वह घायल हो गया और बाद में अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई।
हालांकि, इस घटना को लेकर वकीलों, विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मामले के मुख्य आरोपी की मौत से जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है तथा कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने से पहले ही समाप्त हो सकते हैं।
विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद लाहक अली, जिन्हें 12 जुलाई को उपद्रव के आरोप में गिरफ्तार किया गया, का कहना है कि वे पीड़िता के परिवार से मिलने और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने गए थे। उनका दावा है कि शुरुआती घंटों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आजाद मंडल ने कहा कि घटना के शुरुआती चरण में विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ने पर पर्याप्त पुलिस उपस्थिति नहीं दिखी। उनके अनुसार, प्रभास मंडल की मौत से मामले की कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना प्रभावित हुई है।
सीपीआई (एम) के पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता बिकास रंजन भट्टाचार्य ने भी मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी मुख्य आरोपी की इस प्रकार मृत्यु जांच की निष्पक्षता और साक्ष्यों की उपलब्धता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
जांच और सरकारी पक्ष
जांच के दौरान अब तक तीन जांच अधिकारियों को बदला जा चुका है। पुलिस के अनुसार, विभिन्न मामलों में 35 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है तथा हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और रेल यातायात बाधित करने के आरोप में लगभग 200 लोगों की पहचान की गई है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि कई आरोपियों को राज्य के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने मॉब लिंचिंग में मारे गए इंद्रजीत मंडल के परिवार के लिए 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, पिता के लिए वृद्धावस्था पेंशन तथा अन्य सरकारी सहायता योजनाओं का भी ऐलान किया।
बारुईपुर की यह घटना अब केवल एक जघन्य अपराध की जांच तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार, न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के कारण राज्य की प्रमुख राजनीतिक बहसों में शामिल हो चुकी है।
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