नई दिल्ली: लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और सुधारों की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस कदम को उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए एहतियाती कार्रवाई बताया है, जबकि प्रदर्शनकारियों ने इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार सुबह लगभग साढ़े छह बजे कुछ लोग जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़े, जहां सोनम वांगचुक अपने अनशन के 20वें दिन मंच पर मौजूद थे। कुछ ही देर बाद उन्हें वहां से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।

सिएटल निवासी सॉफ्टवेयर प्रोफेसर प्रशांत मिश्रा, जो पिछले एक महीने से अधिक समय से आंदोलन स्थल पर मौजूद हैं, ने बताया कि शुरुआत में कुछ लोगों ने खुद को मेडिकल टीम का सदस्य बताया, लेकिन उनके निर्धारित समय से पहले पहुंचने पर प्रदर्शनकारियों को संदेह हुआ।
प्रशांत मिश्रा ने कहा, “स्थिति बहुत तेजी से बदली। कुछ ही क्षणों में मंच को घेर लिया गया और सोनम वांगचुक को वहां से ले जाया गया।”
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और संबंधित न्यायिक निर्देशों को ध्यान में रखते हुए की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अनशन के कारण उनकी सेहत की लगातार निगरानी की जा रही थी और आवश्यकता महसूस होने पर उन्हें अस्पताल भेजा गया।
दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि वांगचुक की हालत गंभीर नहीं थी और उन्हें जिस तरीके से ले जाया गया, वह अनावश्यक रूप से कठोर था। आंदोलन समर्थक अभिजीत डिपके ने दावा किया कि मेडिकल रिपोर्टों के अनुसार वांगचुक के स्वास्थ्य संकेतक सामान्य थे।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद डिपके ने घोषणा की कि वे आंदोलन जारी रखते हुए अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। उनका कहना था कि आंदोलन अपने उद्देश्यों से पीछे नहीं हटेगा और संघर्ष जारी रहेगा।

घटना के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने एक सभा आयोजित की, जिसमें कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी वहां पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उनके साथ सख्ती बरती गई और उन्हें मंच के पास जाने से रोका गया। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई।
उत्तर प्रदेश से आंदोलन में शामिल हुए एक युवक सोनू ने बताया कि जब वह मंच की ओर पहुंचे, तब तक सोनम वांगचुक को वहां से ले जाया जा चुका था। उनके अनुसार पूरी कार्रवाई कुछ ही मिनटों में पूरी हो गई।
सोनम वांगचुक कई दिनों से अपनी मांगों के समर्थन में अनशन पर हैं। उनकी अचानक अस्पताल में भर्ती किए जाने की घटना ने न केवल आंदोलन के भीतर बहस को तेज कर दिया है, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध, नागरिक स्वतंत्रताओं और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि आंदोलन विभिन्न रूपों में जारी रहेगा।