नई दिल्ली : इंसाफ न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार को मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों पर कथित हमलों, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के खिलाफ हिंसा के विरोध में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें सांसद और महिलाएं भी शामिल थीं।
प्रदर्शन का आयोजन Monitoring Committee of Indian Muslims (MCIM) की ओर से किया गया था। हिरासत में लिए गए लोगों में कैराना की सांसद इकरा मुनव्वर हसन, संभल के सांसद जियाउर रहमान बर्क और रामपुर के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी शामिल हैं।
प्रदर्शन में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सादातुल्लाह हुसैनी, पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली, एआईएमआईएम दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्वानंद, कांग्रेस की मीनाक्षी सिंह तथा जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोहतसिम खान समेत कई लोग शामिल हुए।
एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान को भी प्रदर्शन से पहले सुबह साढ़े नौ बजे से कथित तौर पर उनके घर में नजरबंद रखा गया।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने ‘‘अल्पसंख्यकों को शांति से रहने दो’’, ‘‘बुलडोजर कार्रवाई बंद करो’’ और ‘‘मस्जिदों पर हमले बंद करो’’ जैसे नारे लगाए।
सांसद इकरा मुनव्वर हसन ने कहा कि मुसलमानों को अपनी मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों और अन्य संस्थानों पर होने वाले हमलों के खिलाफ विरोध करने का मौलिक अधिकार है। उन्होंने अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में सरकार के रवैये को भेदभावपूर्ण बताया।
समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने हिरासत में लिए जाने के दौरान कहा, ‘‘हमारी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
प्रदर्शन में शामिल एक महिला ने कहा कि वह और अन्य लोग मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव को लेकर सवाल उठाने आए थे, लेकिन अपनी बात रखने से पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने दिल्ली पुलिस से हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने की मांग की है।
फ्रैटर्निटी मूवमेंट के राष्ट्रीय महासचिव लुबैब बशीर ने दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया और बाद में निर्वाचित प्रतिनिधियों तथा सामुदायिक नेताओं समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
यह प्रदर्शन उज्जैन की ऐतिहासिक शाही मस्जिद के एक हिस्से को सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत हटाए जाने के एक दिन बाद हुआ। यह कार्रवाई सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए सड़क चौड़ीकरण परियोजना से जुड़ी बताई गई है।
